Wednesday, 16 November 2016

ये चीज़ें रोकती है आपको अमीर होने से..

आकांशा शर्मा :

मदिरापान करने वाले लोग

रामचरित मानस में उल्लिखित बातों के अनुसार वे लोग जो हर समय नशे में रहते हैं, जो मादक पदार्थों ( नशे के पदार्थ ) का सेवन करते हैं उनका सारा धन अपनी इसी आदत को पूरा करने में व्यर्थ हो जाता है और उनके ऊपर कभी देवी लक्ष्मी की कृपा नहीं होती, ऐसे लोग कभी अमीर नहीं बन सकते।


धोखेबाज जीवनसाथी

ऐसे लोग जो अपने जीवनसाथी के साथ धोखा करते हैं वे लोग कभी भी धनी नहीं बन सकते क्योंकि वे पति या पत्नी से छिपाकर अपने धन को अन्य लोगों पर खर्च करते हैं जो कि सही नहीं होता। मृत्यु के बाद ऐसे लोग नर्क की प्राप्ति करते हैं।



लालची लोग

जो धन का ज्यादा लालच करता है, जो हमेशा धन के पीछे भागता रहता है वह कभी धन प्राप्त नहीं कर पाता। उसकी तलाश अधूरी ही रह जाती है।


घमंडी व्यक्ति

 जिनके अंदर भरपूर घमंड होता है, जो दूसरे लोगों को सम्मान देना नहीं जानते, जो खुद को औरों से ऊपर मानते हैं वे लोग कभी भी धन एकत्र नहीं कर सकते क्योंकि वो लोग घमंड की वजह से किसी से मेलजोल नहीं रख पाते।



नौकरीपेशा लोग

ऐसा कहा जाता है कि जो लोग दूसरों की नौकरी करते हैं, वे कभी अपने सपने पूरे नहीं कर पाते, वे कभी अपने लिए धन नहीं जोड़ पाते। वे बस धन कमाते रहते हैं, उसे एकत्र नहीं कर पाते।


आदत

वैसे आजकल तो हम सभी नौकरीपेशा वाले हैं  लेकिन अगर इसके अलावा आपके भीतर कोई और आदत भी है तो उसे तुरंत त्याग दीजिए उससे आप कभी अमीर नई होपाओगे

Tuesday, 15 November 2016

केवल नाम जपने से ही मिलेगा फल : जानें कैसे

 

आकांशा शर्मा : भगवान हनुमान के कई नाम हैं ऐसी मान्यता है कि इनके इन नामों के जाप से परेशानी दूर होती है ।

हनुमान जी के चमत्कारी 108 नाम

1.आंजनेया : अंजना का पुत्र

2.महावीर : सबसे बहादुर

3.हनूमत : जिसके गाल फुले हुए हैं


4.मारुतात्मज : पवन देव के लिए रत्न जैसे प्रिय

5.तत्वज्ञानप्रद : बुद्धि देने वाले

6.सीतादेविमुद्राप्रदायक : सीता की अंगूठी भगवान राम को देने वाले


7.अशोकवनकाच्छेत्रे : अशोक बाग का विनाश करने वाले

8.सर्वमायाविभंजन : छल के विनाशक


9.सर्वबन्धविमोक्त्रे : मोह को दूर करने वाले

10.रक्षोविध्वंसकारक : राक्षसों का वध करने वाले



11.परविद्या परिहार : दुष्ट शक्तियों का नाश करने वाले

12.परशौर्य विनाशन : शत्रु के शौर्य को खंडित करने वाले


13.परमन्त्र निराकर्त्रे : राम नाम का जाप करने वाले

14.परयन्त्र प्रभेदक : दुश्मनों के उद्देश्य को नष्ट करने वाले

15.सर्वग्रह विनाशी : ग्रहों के बुरे प्रभावों को खत्म करने वाले

16.भीमसेन सहायकृथे : भीम के सहायक

17.सर्वदुखः हरा : दुखों को दूर करने वाले


18.सर्वलोकचारिणे : सभी जगह वास करने वाले

19.मनोजवाय : जिसकी हवा जैसी गति है

20.पारिजात द्रुमूलस्थ : प्राजक्ता पेड़ के नीचे वास करने वाले

21.सर्वमन्त्र स्वरूपवते : सभी मंत्रों के स्वामी

22.सर्वतन्त्र स्वरूपिणे : सभी मंत्रों और भजन का आकार जैसा


23.सर्वयन्त्रात्मक : सभी यंत्रों में वास करने वाले

24.कपीश्वर : वानरों के देवता

25.महाकाय : विशाल रूप वाले

26.सर्वरोगहरा : सभी रोगों को दूर करने वाले


27.प्रभवे : सबसे प्रिय

28.बल सिद्धिकर :

29.सर्वविद्या सम्पत्तिप्रदायक : ज्ञान और बुद्धि प्रदान करने वाले

30.कपिसेनानायक : वानर सेना के प्रमुख

31.भविष्यथ्चतुराननाय : भविष्य की घटनाओं के ज्ञाता

32.कुमार ब्रह्मचारी : युवा ब्रह्मचारी


33.रत्नकुण्डल दीप्तिमते : कान में मणियुक्त कुंडल धारण करने वाले

34.चंचलद्वाल सन्नद्धलम्बमान शिखोज्वला : जिसकी पूंछ उनके सर से भी ऊंची है

35.गन्धर्व विद्यातत्वज्ञ, : आकाशीय विद्या के ज्ञाता

36.महाबल पराक्रम : महान शक्ति के स्वामी


37.काराग्रह विमोक्त्रे : कैद से मुक्त करने वाले

38.शृन्खला बन्धमोचक: तनाव को दूर करने वाले

39.सागरोत्तारक : सागर को उछल कर पार करने वाले


40.प्राज्ञाय : विद्वान

41.रामदूत : भगवान राम के राजदूत

42.प्रतापवते : वीरता के लिए प्रसिद्ध

43.वानर : बंदर


44.केसरीसुत : केसरी के पुत्र

45.सीताशोक निवारक : सीता के दुख का नाश करने वाले

46.अन्जनागर्भसम्भूता : अंजनी के गर्भ से जन्म लेने वाले

47.बालार्कसद्रशानन : उगते सूरज की तरह तेजस

48.विभीषण प्रियकर : विभीषण के हितैषी


49.दशग्रीव कुलान्तक : रावण के राजवंश का नाश करने वाले

50.लक्ष्मणप्राणदात्रे : लक्ष्मण के प्राण बचाने वाले

51.वज्रकाय : धातु की तरह मजबूत शरीर

52.महाद्युत : सबसे तेजस


53.चिरंजीविने : अमर रहने वाले

54.रामभक्त : भगवान राम के परम भक्त

55.दैत्यकार्य विघातक : राक्षसों की सभी गतिविधियों को नष्ट करने वाले

56.अक्षहन्त्रे : रावण के पुत्र अक्षय का अंत करने वाले

57.कांचनाभ : सुनहरे रंग का शरीर

58.पंचवक्त्र : पांच मुख वाले

59.महातपसी : महान तपस्वी



60.लन्किनी भंजन : लंकिनी का वध करने वाले

61.श्रीमते : प्रतिष्ठित

62.सिंहिकाप्राण भंजन : सिंहिका के प्राण लेने वाले

63.गन्धमादन शैलस्थ : गंधमादन पर्वत पार निवास करने वाले

64.लंकापुर विदायक : लंका को जलाने वाले

65.सुग्रीव सचिव : सुग्रीव के मंत्री

66.धीर : वीर

67.शूर : साहसी


68.दैत्यकुलान्तक : राक्षसों का वध करने वाले

69.सुरार्चित : देवताओं द्वारा पूजनीय

70.महातेजस : अधिकांश दीप्तिमान

71.रामचूडामणिप्रदायक : राम को सीता का चूड़ा देने वाले

72.कामरूपिणे : अनेक रूप धारण करने वाले

73.पिंगलाक्ष : गुलाबी आँखों वाले

74.वार्धिमैनाक पूजित : मैनाक पर्वत द्वारा पूजनीय



75.कबलीकृत मार्ताण्डमण्डलाय : सूर्य को निगलने वाले

76.विजितेन्द्रिय : इंद्रियों को शांत रखने वाले

77.रामसुग्रीव सन्धात्रे : राम और सुग्रीव के बीच मध्यस्थ

78.महारावण मर्धन : रावण का वध करने वाले


79.स्फटिकाभा : एकदम शुद्ध

80.वागधीश : प्रवक्ताओं के भगवान

81.नवव्याकृतपण्डित : सभी विद्याओं में निपुण

82.चतुर्बाहवे : चार भुजाओं वाले


83.दीनबन्धुरा : दुखियों के रक्षक

84.महात्मा : भगवान

85.भक्तवत्सल : भक्तों की रक्षा करने वाले

86.संजीवन नगाहर्त्रे : संजीवनी लाने वाले

87.सुचये : पवित्र

88.वाग्मिने : वक्ता

89.दृढव्रता : कठोर तपस्या करने वाले

90.कालनेमि प्रमथन : कालनेमि का प्राण हरने वाले

91.हरिमर्कट मर्कटा : वानरों के ईश्वर


92.दान्त : शांत

93.शान्त : रचना करने वाले

94.प्रसन्नात्मने : हंसमुख


95.शतकन्टमदापहते : शतकंट के अहंकार को ध्वस्त करने वाले

96.योगी : महात्मा

97.मकथा लोलाय : भगवान राम की कहानी सुनने के लिए व्याकुल

98.सीतान्वेषण पण्डित : सीता की खोज करने वाले


99.वज्रद्रनुष्ट :

100.वज्रनखा : वज्र की तरह मजबूत नाखून

101.रुद्रवीर्य समुद्भवा : भगवान शिव का अवतार

102.इन्द्रजित्प्रहितामोघब्रह्मास्त्र विनिवारक : इंद्रजीत के ब्रह्मास्त्र के प्रभाव को नष्ट करने वाले

103.पार्थ ध्वजाग्रसंवासिने : अर्जुन के रथ पार विराजमान रहने वाले

104.शरपंजर भेदक : तीरों के घोंसले को नष्ट करने वाले


105.दशबाहवे : दस्द भुजाओं वाले

106.लोकपूज्य : ब्रह्मांड के सभी जीवों द्वारा पूजनीय

107.जाम्बवत्प्रीतिवर्धन : जाम्बवत के प्रिय

108.सीताराम पादसेवा : भगवान राम और सीता की सेवा में तल्लीन रहने वाले


Monday, 14 November 2016

मोर पंख करेगा परेशानियाँ दूर


आकांशा शर्मा : इस बात में कोई संदेह नहीं है कि मोर पंख हमारे आस-पास की नकारात्मक ऊर्जा को दूर रखता है और हमारे जीवन में सकारात्मक ऊर्जा का संचार करता है। देवराज इंद्र को मोरपंख का सिंहासन भाता है, भगवान श्रीकृष्ण ने भी अपने मुकुट पर मोरपंख को सजाया। यहां तक कि पौराणिक काल में महर्षियों ने मोरपंख की कलम बनाकर बड़े-बड़े ग्रंथों की रचना की। इन उदाहरणों से यह साबित होता है कि मोर का पंख हमारे लिए कितना पवित्र और महत्वपूर्ण है। प्राचीन काल से ही मोर के पंखों का इस्तेमाल कई तरह के कामों के लिए किया जाता रहा है।

मोर के पंख के कुछ खास उपाय जो आपकी परेशानियों को दूर कर सकते हैं :


1- मोर का पंख किसी भी स्थान को बुरी शक्तियों  से बचाकर रखने की क्षमता रखता है।मोर पंख घर में लगाने से घर में सकारात्मक ऊर्जा का वास होता है ।


2- मोर के पंख का इस्तेमाल करके भूत-बाधा, नज़र दोष, रोग मुक्ति, ग्रह दोष, वास्तु दोष जैसी समस्याओं से हमेशा के लिए छुटकारा मिल सकता है।


3- मोर का पंख विद्यार्थियों के लिए लाभदायक होता है। विद्यार्थी पुस्तकों के बीचों-बीच मोर पंख रखकर लाभ उठा सकते हैं। ।


4- नव ग्रहों की खराब दशा से बचने के लिए भी मोर का पंख आपकी मदद कर सकता है। घर में अलग अलग स्थान पर मोर का पंख रखने से घर का वास्तु दोष दूर होता है।


5- मोर के पंख का उपयोग रोगों के इलाज के लिए भी किया जाता है। मोर के पंख से तपेदिक, दमा, लकवा, नजला तथा बांझपन जैसे रोगों का इलाज किया जा सकता है।


6- घर के दक्षिण-पूर्व कोण में मोर का पंख लगाने से घर में बरकत होने लगती है। घर के सदस्यों पर अचानक से आनेवाले किसी भी कष्ट से रक्षा होती है।


7- मोर के पंख और सांप के बीच में दुश्मनी है इसलिए मोर का पंख घर में रखने से सांप घर में प्रवेश नहीं करता।इसके अलावा मोर का पंख घर के पूर्वी और उत्तर-पश्चिम दीवार में लगाने से राहू का दोष की भी नहीं परेशान करता है।


8- मोर का एक पंख किसी मंदिर में राधाकृष्ण कि मूर्ती के मुकुट में 40 दिन के लिए स्थापित करें। हर रोज शाम को मक्खन और मिश्री का भोग लगाएं। फिर 41 वें दिन उसी मोर के पंख को मंदिर से घर लाकर अपने लॉकर में रखें. आप खुद महसूस करेंगे कि घर में सुख शांति की वृद्धि हो रही है।

9- कालसर्प दोष को भी दूर करने की इस मोर के पंख में अद्भुत क्षमता है। कालसर्प वाले व्यक्ति को अपने तकिये के खोल के अंदर 7 मोर के पंख सोमवार की रात को रखना चाहिए और उसी तकिए पर सोना चाहिए।


10- अगर आप किसी शत्रु से परेशान हैं, तो मोर के पंख पर हनुमान जी के मस्तक के सिंदूर से मंगलवार या फिर शनिवार को उसका नाम लिखकर अपने घर के मंदिर में रात भर रखें। अगली सुबह उठकर बगैर नहाए उसे चलते पानी में प्रवाहित कर दें। ऐसा करने से आपका शत्रु भी आपसे मित्रता का व्यवहार करने लगेगा।


11- अगर घर में कोई बच्चा जिद्दी हो, तो मोर के पंखों से बच्चे को हवा देने से धीरे-धीरे उसकी जिद कम होने लगेगी। मोर के पंख को चांदी के  ताबीज़ में डालकर नवजात बच्चे के सिर के पास रखने पर बच्चे की नज़र दोष और किसी भी तरह की अला-बला से रक्षा होती है।



Friday, 11 November 2016

क्या हुआ जब माँ लक्ष्मी से हुई भूल ?


एक बार भगवान विष्णु जी ने धरती पर घुमने का विचार मन में किया | स्वामी को त्यार होता देख कर लक्ष्मी मां ने पुछा ! आज सुबह सुबह कहा जाने कि तैयारी हो रही है ??  विष्णु जी ने कहा धरती लोक पर घुमने जा रहा हूँ , तभी माँ लक्ष्मी  बोली  हे देव क्या मै भी आप के साथ चल सकती हूँ ???? विष्णु भगवान्  ने सोचा और बोले एक शर्त पर, तुम मेरे साथ चल सकती हो तुम धरती पर पहुँच कर उत्तर दिशा की ओर बिलकुल मत देखना,माँ लक्ष्मी ने स्वीकार किआ और चलने को त्यार होगयी | जब माता लक्ष्मी और भगवान् विष्णु पहुँचे तो चारो ओर हरियाली ही हरियाली थी, उस समय चारो ओर बहुत शान्ति थी, ओर धरती बहुत ही सुन्दर दिख रही थी,  मां लक्ष्मी धरती को देख रही थी, ओर भुल गई कि पति को क्या वचन दे कर आई है? और चारो ओर देखती हुई  कब उत्तर दिशा की ओर देखने लगी पता ही नही चला। वहीं उत्तर दिशा की ओर एक सुंदर बगीचा था,मां लक्ष्मी बिना सोचे समझे उस खेत में  गई ओर एक सुंदर सा फ़ुल तोड लाई, जब माँ लक्ष्मी वापिस स्वर्गलोक पहुंचीं  तो उन्होंने देखा की विष्णु जी के आँखों में आँसू थे माँ लक्ष्मी ने पूछा की स्वामी आप रो क्यों रहे हो तब भगवन बोले कभी भी किसी से बिना पुछे उस का कुछ भी नही लेना चाहिये, ओर साथ ही अपना वचन भी याद दिलाया।


माँ लक्ष्मी को अपनी भूल का बहुत पछतावा हुआ... वे बोली स्वामी पश्चाताप का कोई तो तरीका होगा आप बताएं, मझे माफ़ करदें मुझसे  भूल होगयी भगवान विष्णु ने कहा तुम ने जो भुल की है उस की सजा तो तुम्हे जरुर मिलेगी?? जिस माली के खेत से तुम ने  बिना पुछे फ़ुल तोडा है, यह एक प्रकार की चोरी है, इस लिये अब तुम तीन साल तक माली के घर नोकर बन कर रहॊ, उस के बाद मै तुम्हे स्वर्ग मे वपिस बुलाऊंगा, मां लक्ष्मी ने चुपचाप सर झुका कर हां कर दी |


मां लक्ष्मी एक साधारण ओर गरीब औरत बन कर उस खेत के मालिक के घर गई मालिक का नाम माधव था, माधव की बीबी, दो बेटे ओर तीन बेटिया थी , सभी उस छोटे से खेत में  काम करके किसी तरह से गुजारा करते थे,माधव ने पुछा बहिन तुम कोन हो? और इस समय तुम्हे क्या चाहिये? तब मां लक्ष्मी ने कहा ,मै एक गरीब औरत हूँ मेरी देख भाल करने वाला कोई नही, मेने कई दिनो से खाना भी नही खाया मुझे कोई भी काम देदॊ, साथ में मै तुम्हरे घर का काम भी कर दिया करुँगी , बस मुझे अपने घर में एक कोने में आसरा देदो? माधाव बहुत ही अच्छे दिल का मालिक था, उसे दया आ गई , लेकिन उस ने कहा, बहिन मै तो बहुत ही गरीब हूँ , मेरी कमाई से मेरे घर का खर्च मुश्किल से चलता है, लेकिन अगर मेरी तीन की जगह चार बेटियाँ होती तो भी
मैने गुजारा करना था, अगर तुम मेरी बेटी बन कर जैसा  रुखा सुखा हम खाते है उस मै खुश रह सकती हो तो बेटी अन्दर आ जाओ।


जिस दिन मां लक्ष्मी माधव के घर आई थी उस से दुसरे दिन ही माधाव को इतनी आमदनी हुई  फ़ुलो से की शाम को एक गाय खरीद ली,फ़िर धीरे धीरे माधव ने काफ़ी जमीन खारीद ली, ओर सब ने अच्छे अच्छे कपडे भी बनवा लिये, ओर फ़िर एक बडा पक्का घर भी बनवा लिया, बेटियो ओर बीबी ने गहने भी बनवा लिये |
एक दिन माधव जब अपने खेतो से काम खत्म करके घर आया तो उस ने अपने घर के सामने दुवार पर एक देवी स्वरुप गहनो से लदी एक औरत को देखा, ध्यान से देख कर पहचान गया अरे यह तो मेरी मुहं बोली चौथी बेटी यानि वही औरत है, और पहचान गया कि यह तो मां लक्ष्मी है |
माधव बोला हे मां हमे माफ़ कर हमने तेरे से अंजाने में ही घर और खेत में काम करवाया, है मां यह केसा अपराध होगया, हे मां हम सब को माफ़ कर दो


अब मां लक्ष्मी मुस्कुरायी और बोली हे माधव तुम बहुत ही अच्छे और दयालु व्यक्ति  हो, तुम ने मुझे अपनी बेटी की तरह से रखा, अपने परिवार के सदस्या की तरह से, इस के बदले में तुम्हे वरदान देती हूँ कि तुम्हारे पास कभी भी खुशियो की और धन की कमी नही रहेगी  तुम्हे सारे सुख मिलेंगें जिसके तुम हकदार हो,
और फ़िर मां अपने स्वामी के दुवारा भेजे रथ में बैठकर स्वर्ग चली गई |