Tuesday, 22 November 2016

शंख बजाने का रहस्य

शास्त्रों में लिखा है कि-
मंदिर में शंख क्यों बजाते हैं? इसके पीछे क्या कारण है ? शंख बजाने के पीछे धार्मिक कारण तो है साथ ही इसके
पीछे वैज्ञानिक कारण भी है और शंख बजाने वाले व्यक्ति को स्वास्थ्य लाभ भी मिलता है । इस संबंध में हमारे धर्म ग्रंथ कहते हैं सृष्टी आत्मा से, आत्मा आकाश से, आकाश
वायु से, वायु अग्नि से, आग जल से और जल पृथ्वी से उत्पन्न हुआ है और इन सभी तत्व से मिलकर शंख की उत्पत्ति मानी जाती है।
यदि कोई बोलने में असमर्थ है या उसे हकलेपन का दोष है तो शंख बजाने से ये दोष दूर होते हैं।
शंख बजाने से फेफड़ों कई के रोग दूर होते हैं जैसे दमा, कास प्लीहा यकृत और इन्फ्लून्जा आदि रोगों में शंख ध्वनि फायदा पहुंचाती है।

शंख के जल से शालीग्राम को स्नान कराएं और फिर उस जल को यदि गर्भवती स्त्री को पिलाया जाए तो पैदा होने वाला शिशु पूरी तरह स्वस्थ होता है। साथ ही बच्चा कभी मूक या हकला नहीं होता।

यदि शंखों में दूध भरकर शालीग्राम का अभिषेक करें। फिर इस दूध को नि:संतान महिला को पिलाएं। इससे उन्हें शीघ्र ही संतान का सुख मिलता है ।

शंख बजाने से दमा, अस्थमा, क्षय जैसे जटिल रोगों का प्रभाव काफी हद तक कम हो सकता है ।
इसका वैज्ञानिक कारण यह है कि शंख बजाने से सांस की अच्छी एक्सरसाइज हो जाती है।

शंख में जल भरकर रखने और उस जल से पूजन सामग्री धोने और घर में छिडकने से वातावरण शुद्ध रहता है।
शंख से शिवलिंग,कृष्ण या लक्ष्मी विग्रह पर जल या पंचामृत अभिषेक करने पर देवता प्रसन्न होते हैं ।
शंख की ध्वनि से भक्तों को पूजा-अर्चना के समय की सूचना मिलती है। आरती के समापन के बाद इसकी ध्वनि से मन को शांति मिलती है ।

कल्याणकारी शंख दैनिक जीवन में दिनचर्या को कुछ समय के लिए विराम देकर मौन रूप से देव अर्चना के लिए प्रेरित करता है।


Monday, 21 November 2016

सूर्यदेव आए स्वप्न में - जानिये क्या होगा परिणाम


 हर सपने का एक अर्थ होता है।  स्वप्न हमारे जीवन से जुड़े होते हैं । ये स्वप्न आने वाले कल के कुछ संकेत लेकर आते हैं। सपने में यदि देवी-देवता के दर्शन हों तो इसका क्या अर्थ होता है?


प्रत्येक देवी-देवता का दिखना, भविष्य में आने वाली स्थिति की ओर इशारा करता है । सूर्य देव जिन्हें यश और प्रतिष्ठा के स्वामी माना जाता है,
यदि आपके स्वप्न में सूर्य के दर्शन आपको हो जाएं,


पहला संकेत :  आपको सूर्य उपासना आरंभ कर देनी चाहिए। सूर्य देव आपकी ओर से भक्ति भाव चाहते हैं।



दूसरा संकेत : अब आपके ऊपर शनि देव का बुरा प्रभाव नहीं होगा। शनि, सूर्य देव के पुत्र हैं । ऐसा सपना आपके जीवन में खुशहाली लाएगा।


तीसरा संकेत... यदि सूर्य देव स्वप्न में आए तो यह इस बात का भी प्रतीक है की अब जीवन में कई नई चीजें आने वाली हैं।

यदि आपके सपने में सूर्य देव आएं तो अगले दिन सुबह उठकर सूर्य देव से जुड़े उपाय अवश्य करें। सुबह स्नानादि करके उन्हें जल अर्पित करें, सूर्य मंत्र का जाप करें एवं सूर्य देव को लाल रंग के पुष्प


भी चढ़ाएं। ऐसा करने से सूर्यदेव अपनी कृपा आप पर सदा बनाएं रखेंगें

आखिर क्यों बजाते है मंदिर में घंटियां


आकांशा शर्मा : हिंदू धर्म से जुड़े मंदिरों और धार्मिक स्थलों के बाहर आप सभी ने बड़े-बड़े घंटे या घंटियां लटकी तो देखी होंगी जिन्हें मंदिर में प्रवेश करने से पहले भक्त बजाते हैं. लेकिन कभी इसके पीछे की वजह सोची है ?
प्राचीन समय से ही मंदिरों के बाहर इन घंटियों को लगाए जाने की शुरुआत हो गई थी. इसके पीछे यह मान्यता है कि जिन स्थानों पर घंटी की आवाज नियमित तौर पर आती रहती है


वहां का वातावरण हमेशा सुखद और पवित्र बना रहता है और बुरी शक्तियां पूरी तरह निष्क्रिय रहती हैं.
यही वजह है कि सुबह और शाम जब भी मंदिर में पूजा या आरती होती है तो एक लय और धुन के साथ घंटियां बजाई जाती हैं जिससे वहां मौजूद लोगों को शांति की


अनुभूति होती है.
लोगों का मानना है कि घंटी बजाने से मंदिर में स्थापित देवी-देवताओं की मूर्तियों में चेतना जागृत होती है जिसके बाद उनकी पूजा अधिक फलदायक और प्रभावशाली बन जाती है.
पुराणों के अनुसार मंदिर में घंटी बजाने से मानव के कई जन्मों के पाप तक नष्ट हो जाते हैं.कई लोगो का तो यह भी मानना है की जब सृष्टि का प्रारंभ हुआ तब जो आवाज गूंजी थी वही आवाज घंटी बजाने पर भी आती है.


घंटियां 4 प्रकार की होती हैं : 1. गरूड़ घंटी, 2. द्वार घंटी, 3. हाथ घंटी और 4. घंटा। 1. गरूड़ घंटी : गरूड़ घंटी छोटी-सी होती है


जिसे एक हाथ से बजाया जा सकता है। 2. द्वार घंटी : यह द्वार पर लटकी होती है। यह बड़ी और छोटी दोनों ही आकार की होती है। 3. हाथ घंटी : पीतल की ठोस एक गोल प्लेट की तरह होती है


जिसको लकड़ी के एक गद्दे से ठोककर बजाते हैं। 4. घंटा : यह बहुत बड़ा होता है। कम से कम 5 फुट लंबा और चौड़ा। इसको बजाने के बाद आवाज कई किलोमीटर तक चली जाती है।



मंदिर में घंटी लगाए जाने के पीछे ना सिर्फ धार्मिक कारण है बल्कि वैज्ञानिक कारण भी हैं. वैज्ञानिकों का कहना है कि जब घंटी बजाई जाती है तो वातावरण में कंपन पैदा


होता है, जो वायुमंडल के कारण काफी दूर तक जाती है. इस कंपन का फायदा यह है कि इसके क्षेत्र में आने वाले सभी जीवाणु, विषाणु और सूक्ष्म जीव आदि नष्ट हो जाते हैं, जिससे आसपास का



वातावरण शुद्ध हो जाता है.
इसीलिए अगर आप मंदिर जाते समय घंटी बजाने को अहमियत नहीं देते हैं तो अगली बार प्रवेश करने से पहले घंटी बजाना ना भूलें.














Saturday, 19 November 2016

क्यों लगाया जाता है ईश्वर को भोग


आकांशा शर्मा : हिन्दू धर्म में भगवान को भोग लगाने की परंपरा है। लोग भगवान की पूजा भले ना करें परंतु अपने घर में भगवान को प्रसाद जरूर चढ़ाते है। इसके पीछे कारण यह है कि श्रीमद् भागवत गीता में भगवान श्रीकृष्ण कहते हैं कि जो कोई भक्त प्रेमपूर्वक मुझे फूल, फल, अन्न, जल आदि अर्पण करता है। उसे मैं सगुण प्रकट होकर ग्रहण करता हूं।

भगवान की कृपा से जो जल और अन्न हमें प्राप्त होता है उसे भगवान को अर्पित करना चाहिए |
भगवान को प्रसाद चढ़े और तुलसी दल न हो तो भोग अधूरा ही माना जाता है। भगवान्  के भोग में तुलसी रखने की परम्परा सदियो से चली आ रही है। भोग लगाने के बाद ग्रहण किया गया अन्न दिव्य अन्न हो जाता है क्योंकि उसमें तुलसी दल होता है।

एकमात्र तुलसी में यह खूबी है कि इसका पत्ता रोगप्रतिरोधक होता है । यानि कि एंटीबायोटिक है । तुलसी डाला हुआ भोग अमृत समान सीधा शरीर तक पहुँचता है और भगवान को प्रसाद चढ़ाने से घर में अन्न के भंडार हमेशा भरे रहते हैं और घर में कोई कमी नहीं आती है ।

 वैज्ञानिक दृष्टि से स्वस्थ रहने के लिए भोजन करते समय मन को शांत और निर्मल रखना चाहिए। अशांत मन से किया गया भोजन पचने में कठिन होता है।
 ऐसा भोजन करने से शरीर में विकार उत्पन्न होता है और विभिन्न प्रकार के रोग होते हैं।

Friday, 18 November 2016

व्रत-क्यों किआ जाता है?



आकांशा शर्मा : उपवास रखने की परम्परा युगों से चली आ रही है. हिन्दू ग्रंथो में उपवास रखने और खोलने के नियमों का उल्लेख किया गया है. उपवास रखने से शारीरिक व् मानसिक रोग दूर होते हैं, मानसिक रोग दूर होते हैं. उपवास रखने की परम्परा आदि काल से चली आ रही है. आदि काल से ही मन की शान्ति या किसी इच्छा की प्राप्ति से लिए उपवास किया जाता है. महात्मा बुद्ध ने भगवान् की प्राप्ति के लिए उपवास किये थे. अगर हम पौराणिक समय में जाते हैं तो भगवान् राम ने सागर के सामने अपनी वानर सेना को रास्ता देने के लिए उपवास किया था.
देवी पार्वती ने शिव के साथ विवाह करने के लिए उपवास किया था.उपवास करना शरीर के रोगों के लिए बहुत उत्तम रहता है. पेट से सभी बीमारियाँ आरम्भ होती हैं. मन और पेट पर नियंत्रण करने से हमारे सभी रोग समाप्त हो जाते हैं. यदि हम जानवरों की तरफ देखें तो उपवास करने में हमारी आस्था और भी अधिक हो जाती है. पंछी तथा अन्य जानवर जैसे गाय कुता आदि जब बीमार पड़ते हैं तो वे सब खाना छोड़ देतें हैं. और कुछ हे समय में वे ठीक हो जाते हैं.
इसी तरह से बीमारी में हमारे मुंह का स्वाद ख़त्म हो जाता है. हम खाना कम खाना चाहते हैं. खाना खाने को हमारा मन नही करता है.लकिन डॉक्टर खाना खाने की सलाह देतें हैं.
हम सोचते हैं खाना खाने से हमारे शरीर में ताकत आएगी और मरीज़ कमजोर नहीं होगा. बीमारी की हालत में जितना ज्यादा खाना हम लेते हैं बीमारी उतनी ही अधिक प्रबल हो जाती है. उपवास करना रोगों के उपचार का एक साइंटिफिक तरीका है.
पानी के आलावा किसी भी तरह का ठोस खाना न खाने को उपवास कहते हैं.जरूरत से ज्यादा खाना खाने के बुरे नतीजे से बचने का सबसे आसान तरीका उपवास है. उपवास करने से शरीर में रोग पैदा करने वाले तत्व बाहर निकल जाते हैं. आराम शरीर के लिए सबसे जरुरी है उपवास. शरीर के अंगों को काम करने की ताकत मिलती है. शरीर के अंग आगे काम करने के लिए ताकतवर हो जाते हैं. ह्रदय को आराम मिलता है.
 उपवास के दिनों में जीभ व् सांस् लेने की दशा में परिवेर्तन हो जाता है. जीभ से रोगी दशा का पता चलता है.जैसे-जैसे हमारी भूख बढती जाती है और उपवास तोड़ने का समय नजदीक आता है हमारी जीभ का रंग बदल जाता है. जीभ का रंग गुलाबी हो जाता है. सांस् में एक विशेष तरह की खुशबु आ जाती है.
ऐसा माना जाता है की उपवास कष्ट देता है. यह बात सच है लकिन हम उपवास को जितना अधिक कष्टदायक मानते हैं उपवास उतना अधिक कष्टदायक नहीं होता है.

Thursday, 17 November 2016

क्यों करते हैं नमस्ते



हिन्दू शास्त्रों के अन्तर्गत अभिवादन करने के पांच तरीके बताये  गए है जिन में से एक है “नमस्कारम”जिन में से एक है “नमस्कारम”।नमस्कार कई प्रकार से किआ जाता है | संस्कृत में विच्छेद करें तो  नमस्ते दो शब्दों से बना है नमः + ते।नमः का मतलब होता है मैं (मेरा अंहकार) झुक गया।ऐसा माना  गया है की नमस्ते  करने से व्यक्ति दूसरे  व्यक्ति के सामने अपना अहंकार कम कर रहा  है । नमस्ते करते समय में दोनों हाथो को जोड़ कर एक कर दिया जाता है जिसका अर्थ है की इस अभिवादन के बाद दोनों व्यक्ति के दिमाग मिल गए | हम बड़ों के पैर क्यों छूते है ?भारत में बड़े बुजुर्गो के पाँव छूकर आशीर्वाद प्राप्त किया जाता है। अच्छे भावः से किया हुआ सम्मान के बदले बड़े लोग आशीर्वाद देते है जो एक सकारात्मक ऊर्जा होती है।


आदर के निम्न प्रकार है :
* प्रत्युथान : किसी के स्वागत में उठ कर खड़े होना
* नमस्कार : हाथ जोड़ कर सत्कार करना

* उपसंग्रहण : बड़े, बुजुर्ग, शिक्षक के पाँव छूना
* साष्टांग : पाँव, घुटने, पेट, सर और हाथ के बल जमीन पर पुरे लेट कर सम्मान करना
* प्रत्याभिवादन : अभिनन्दन का अभिनन्दन से जवाब देना


Wednesday, 16 November 2016

ये चीज़ें रोकती है आपको अमीर होने से..

आकांशा शर्मा :

मदिरापान करने वाले लोग

रामचरित मानस में उल्लिखित बातों के अनुसार वे लोग जो हर समय नशे में रहते हैं, जो मादक पदार्थों ( नशे के पदार्थ ) का सेवन करते हैं उनका सारा धन अपनी इसी आदत को पूरा करने में व्यर्थ हो जाता है और उनके ऊपर कभी देवी लक्ष्मी की कृपा नहीं होती, ऐसे लोग कभी अमीर नहीं बन सकते।


धोखेबाज जीवनसाथी

ऐसे लोग जो अपने जीवनसाथी के साथ धोखा करते हैं वे लोग कभी भी धनी नहीं बन सकते क्योंकि वे पति या पत्नी से छिपाकर अपने धन को अन्य लोगों पर खर्च करते हैं जो कि सही नहीं होता। मृत्यु के बाद ऐसे लोग नर्क की प्राप्ति करते हैं।



लालची लोग

जो धन का ज्यादा लालच करता है, जो हमेशा धन के पीछे भागता रहता है वह कभी धन प्राप्त नहीं कर पाता। उसकी तलाश अधूरी ही रह जाती है।


घमंडी व्यक्ति

 जिनके अंदर भरपूर घमंड होता है, जो दूसरे लोगों को सम्मान देना नहीं जानते, जो खुद को औरों से ऊपर मानते हैं वे लोग कभी भी धन एकत्र नहीं कर सकते क्योंकि वो लोग घमंड की वजह से किसी से मेलजोल नहीं रख पाते।



नौकरीपेशा लोग

ऐसा कहा जाता है कि जो लोग दूसरों की नौकरी करते हैं, वे कभी अपने सपने पूरे नहीं कर पाते, वे कभी अपने लिए धन नहीं जोड़ पाते। वे बस धन कमाते रहते हैं, उसे एकत्र नहीं कर पाते।


आदत

वैसे आजकल तो हम सभी नौकरीपेशा वाले हैं  लेकिन अगर इसके अलावा आपके भीतर कोई और आदत भी है तो उसे तुरंत त्याग दीजिए उससे आप कभी अमीर नई होपाओगे